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चंबल के 672 डकैतों को समर्पण कराने वाले प्रख्यात गांधीवादी डॉ एस एन सुब्बाराव की श्रद्धांजलि सभा में पहुंचे PPC चीफ मोहन मरकाम...



जांजगीर :- अहिंसक समाज रचना के अग्रदूत विख्यात गांधीवादी तथा युवाओं के प्रेरणाश्र्रोत डाॅ. एसएन सुब्बाराव जी 27 अक्टूबर 2021 को जयपुर में 93 वर्ष की आयु में इस दुनिया को अलविदा कह गये थे। जिसका अंतिम संस्कार मध्यप्रदेश के मुरैना जिला के जौरा स्थित महात्मा गांधी सेवा आश्रम में राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया तथा उनके अस्थि कलश को पूरे देश में अनुयायिओं द्वारा ले जाया गया।

इसी कड़ी में भाई जी के अस्थि कलश को प्रयोग आश्रम तिल्दा में रखा गया है, जिसके श्रद्वांजलि सभा में छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष मोहन मरकाम तथा प्रदेश युवा कांग्रेस अध्यक्ष कोकोपाडी भी शामिल हुए श्री मरकाम ने भाई जी  को एक महान गांधीवादी विचारक तथा देश व दुनिया के युवाओं को सत्य, अहिंसा, भाईचारा और सद्वावना सिखाने वाला महापुरूष बताया सभा को कोकोपाडी ने भी संबोधित किया।

सुप्रसिद्व गांधी विचारक एवं 1972 में चंबल क्षेत्र के 672 डकैतों को समर्पण करा कर चंबल क्षेत्र में शांति स्थापित करने वाले एवं उन 672 डकैतों को नया जीवन देने वाले ऐसे व्यक्ति मरते नही शब्द, बोल, विचार, सर्वधर्म प्रार्थना, गीत-संगीत, अच्छे कर्म, साधना, मौन, श्रम कभी मरते नहीं है। कभी विविध कारण से धूंधले या मंद पड़ सकते है मगर जिंदा रहते है। समय के साथ वे फलते फूलते रहते है, लोगों की वाणी में, कंठो में विचारों में, यादो में, इतिहास में, दिलो में दिमाग में आते रहते है, गूंजते है, उभरते है, फलतू फूलते फूटते है झरने की तरह सहज सरल सुलभ सदा साझा जीवन भाईजी के पास यह सब बहुत सहजता, सरलता, स्पष्टता के साथ उनका अंग बन गया। सोते-जागते, आते-जाते , उठते-बैठते, चलते-फिरते, खाते-पीते, स्वच्छ हवा, पानी की तरह सबको सहज उपलब्ध एक चुंबकीय क्षेत्र बनाता था जिसका आकर्षण अपनी ओर खींचता है। जिन खोजा तिन पाईया
उनकी जीवन एक नदी की तरह रहा जो सदैव सक्रिय रहती है। चाहे पहाड़ हो या धरातल, ऊंचाई हो या ढलान, गांव हो या शहर, बस्ती हो या जंगल, देश हो या विदेश, बंगलौर, दिल्ली हो या चंबल सुनसान हो या बीहड़ वही स्वभाव, निडरता, पहनावा, सक्रियता, शांति, सौहृार्द साझापन, सद्भावना, श्रमदान, सर्वधर्म प्रार्थना, गीत, खेल भारत से लेकर अमेरिका तक सबके भाईजी हर आयु वर्ग, स्थान से भाईजी संपर्क, संवाद साधन की विशेष क्षमता रखते थे, चाहे गांव की सभा हो या संयुक्त राष्ट्र संघ की एक तरफ बच्चों के लिए जेब से गुब्बारा निकलता, किशोर युवा जवान, जिसके लिए जो सार्थक, उपयोगी उसकी समझ क्षमता के अनुसार उसके सामने रखना। संवाद संपर्क की व्यापकता संवाद, संपर्क में इतनी व्यापकता की आज भी बड़ी संख्या में लोगों के पास भाई जी का लिखा हुआ निवास, शिविर, सभा, सम्मेलन, प्लेटफार्म, रेल, प्रयास से लिखा हुआ पत्र, अंतरर्देशीय पत्र, पोस्ट कार्ड आसानी से मिल जाएगा। आजकल फोन करके हालचाल पूछते, बात करते हर परिवार अपना परिवार-बंगलौर का घर छोड़कर दिल्ली आए मगर देश दुनिया में इतने घर बन गए कि आज सब की गिनती करना कठिन है।

व्यक्ति नही समूह/संगठन डाॅ. एसएन सुब्बाराव अपने आप में किसी समूह, संगठन से ज्यादा प्रभावी, व्यापक रहे उन्होंने राष्ट्रीय युवा योजना नामक संगठन बनाया। भाईजी के स्वभाव के कारण यह संगठन कम परिवार के रूप में ज्यादा विकसित हुआ। इसकी यह बड़ी विशेषता है ना सदस्यता रजिस्टर ना सदस्यता शुल्क ना विशेष कोई बंधन शर्ते एक व्यापक सोच समझ विचार लिए परिवार की तरह सबके लिए खुले दरवाजे सबका स्वागत सब अपने कोई पराया नही लोग जुडते गए और कारवां बनता गया छात्र जीवन में शामिल, कांग्रेस सेवा दल में शामिल (राष्ट्रीय मुख्य संगठक), गांधी शांति प्रतिष्ठान के आजीवन सदस्य, गांधी शताब्दी में बड़ी लाईन, छोटी लाईन में चली गांधी दर्शन रेलगाड़ी में शामिल, शिविर में शामिल, भारत जोड़ों में शामिल, चंबल शांति कार्य में शामिल, विभिन्न गतिविधियों में शामिल वकील ही वकील राष्ट्रपिता महात्मा गांधी से लेकर भाईजी तक वकीलों की एक बड़ी श्रृंखला, जमात है जिसने आजादी की लड़ाई से लेकर राष्ट्र रचना, निर्माण के लिए अपना सर्वस्व समर्पण न्यौछावर कर दिया। देश के लिये जीये और देश के लिये मरे अगर सब के नाम लिखने लगूं तो कितने ही पन्ने, पेज भर जाएंगे इनमे से अधिकांश वे है जिन्होंने न्यायालय की अदालत के बजाय जन-जन में न्याय, समता, एकता, शांति, एकजुटता, रचना, निर्माण, जागरूकता करने के लिए अपने को खपाय।
बदला नही बदलाव चाहिए के लिए काम किया शांति, अहिंसा, करूणा, प्रेम से बदलाव लाए। नौजवान आओ रे-नए समाज की रचना में तरूणाई का योगदान किसी भी समाज, देश में बदलाव की असली ताकत युवा पीढ़ी होती है। भाईजी ने युवाओं को दिशा देने उनकी दशा सुधाराने के लिए सतत् प्रयास किए युवाओं को रचना, निर्माण से जोडा भाईजी की कामना सद्भावना-सद्भावना देश में कहीं भी हिंसा मारपीट दंगा फसाद हुआ भाईजी के आहृावान पर उनके नेतृत्व में सैकड़ो युवा साथी शांति सद्भावना के लिए पहुंच जाते थे। कमश्मीर से कन्याकुमारी, अरूणाचल से द्वारका अर्थात पूर्व से पश्चिम और उत्तर से दक्षिण इसमें अण्डमान निकोबार, लक्ष्यद्वीप जैसे स्थान भी शामिल है।
श्रद्वांजलि सभा में नगर पालिका अध्यक्ष, पार्षद, और प्रयोग समाज सेवी संस्था के वरिष्ठ साथी व एकता परिषद के समन्वयक अब्दुल खालिद खान, संस्था के तकनीकी सलाहकार इंजीनियर रोशन तिवारी, अरूण कुमार, व्यवस्थापक सीताराम सोनवानी, मंतराम निषाद, दिनेश वर्मा, सुरजो बहन और युवा साथियों में चंद्रशेखर वर्मा, नरेन्द्र कुमार, व लोगों की उपस्थित रहा।

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