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रायपुर होम्योपैथी स्टडी सर्कल के तत्वावधान में हाॅटल स्टे इन रायपुर में एक दिवसीय राज्य स्तरीय कार्यशाला कुत सम्पन्न...



रायपुर स्टडी सर्कल के तत्वाधान में हॉटल स्टे इिन, रामसागर पारा, रायपुर में एक दिवसीय राज्य स्तरीय होम्योपैथी कार्यशाला का आयोजन दिनांक 31/10/2021 को किया गया, जिसमें प्रदेश भर के लगभग सैकड़ों होम्योपैथी चिकित्सक प्रशिक्षित हुए। कार्यशाला के दौरान रायपुर होम्योपैथी स्ट्डी सर्कल के डायरेक्टर डॉ. संजय मनवानी होम्योपैथी केस रिसिविंग के दौरान मरीज एवं चिकित्सक के समन्वय, मरीज की अन्तःमनोभावना को संवेदनशीलता एवं समझदारी से समझकर होम्योपैथी चिकित्सा करने की सलाह पर बल दिया। उन्होंने प्रशिक्षण के दौरान मरीज के जीवन जीने का तरीके, उनके जीवन में होने वाली घटना उस पर उनका एक्शन एवं रिएक्शन को बहुत ही सुक्षमता से अध्ययन कर मरीज के उपलब्ध डाटा का सम्मान एवं मरीज की बीमारी की अवस्था एवं दवाई की जरूरत के अनुसार होम्योपैथी दवाई का चयन पर विशेष ध्यान आकर्षण करते हुए चिकित्सकों को प्रशिक्षित किया।डॉ. संजय मनवानी ने अपने उद्बोधन में कहा - मुँह के कैंसर से पीड़ित मरीज के लाईफ स्पेस एवं व्यक्तित्व अध्ययन के दौरान चयन होम्योपैथी दवाई के अलावा उस बीमारी की अवस्था की सेक्टर एवं आर्गन रेमेडी के बारे में प्रमुखता से समझाया। संस्था के डिप्टी डायरेक्टर डॉ. संजय चन्द्राकर अपने केस स्टडी में फटाके के तीव्र धमाके से ऑकस्टिक ट्रामा के मरीज के कान में निरंतर आवाज (टिनिटस), चक्कर आना एवं कान का सुनाई नहीं देने की तकलीफ से मरीज परेशान था,उससे डिप्रेशन का शिकार हो गया था।

ऐसे मरीज के लाईफ स्पेस एवं बीमारी के उपलब्ध लक्षण से नेट्रम सेलिसिलिकम नामक औषधि से सफलता पूर्वक उपचार को समझाया।डॉ. संजय चन्द्राकर ने कान के बाह्य, मध्य एवं आंतरिक संरचना एवं कान के विभिन्न स्तरों पर होने वाली जटिल बीमारियों को विस्तार से समझाया। डॉ. कुलभूषण मनवानी एवं डॉ. विक्रम भदौरिया ने बीमारियों के पैथोजेनेसिस पर प्रकाश डाला। डॉ. कुलभूषण मनवानी ने अपने प्रेजेंटेशन में रेयर रेमेडी तक पहुँचने के एप्रोच एवं उनकी उपयोगिता को बताया। डॉ. धनंजय साहू ने अपनी प्रेजेंटेशन में कहा कि होम्योपैथी चिकित्सा पद्धति एवं आई.सी.आर. पद्धति से हम सिर्फ मरीजों के उपचार ही नहीं करते बल्कि मरीज की जीवनशैली एवं व्यक्तित्व के अध्ययन से मरीज के जीवन से हमें सीख भी मिलती है तथा हमारे जीवन के उतार-चढ़ाव के लिए साहस एवं धैर्य भी मिलता है। डॉ.ने होम्योपैथी केस टेकिंग एवं आई.सी.आर. पद्धति के केस रिसिविंग के महत्व को राकेश साहू समझाया। केस रिसिविंग के दौरान बीमारी को समझने में

 कठिनाइयाँ एवं मनुष्य के स्वभाव को समझने में आने वाली कठिनाइयों को विस्तार से समझाया। डॉ. अमित कुमार जाटवर ने जीवन में ट्रेनिंग का महत्व एवं होम्योपैथी चिकित्सा में आई.सी.आर. पद्धति से ट्रेनिंग के महत्व को बताया, तथा मुँह के कैंसर उपचार के तरीके को संक्षिप्त में बताया। कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य तीन अलग-अलग केस के माध्यम से मरीजों के जीवनशैली, व्यक्तित्व एवं उनकी बीमारी की अवस्था का अध्ययन में उपलब्ध डाटा का सम्मान, उचित एप्रोच एवं मरीज के हर पहलुओं के अध्ययन के पश्चात् आवश्यकता के अनुरूप ही होम्योपैथी दवाई का चयन को होम्योपैथी चिकित्सकों, इंटर्न एवं होम्योपैथी के छात्र-छात्राओं को सिखाना था।एक दिवसीय कार्यशाला में होम्योपैथी स्टडी सर्कल के संस्थापक डॉ. सुशील हरीरमानी, डॉ.कंचन हरीरमानी, डॉ. प्रीति मंजीठिया, डायरेक्टर डॉ. संजय मनवानी, डिप्टी डायरेक्टर डॉ. संजय चन्द्राकर, डॉ. धनंजय साहू, डॉ. राकेश साहू, डॉ. सरस्वती कश्यप, डॉ. श्वेता चेतानी, डॉ. अमित कुमार जाटवर, डॉ. पिंकी जसवानी, डॉ. अतुल ताम्रकार, डॉ. विक्रम भदौरिया, डॉ. मनीषा, डॉ. सूरज राजपूत, डॉ. कुलभूषण मनवानी, डॉ. प्राची साहू, डॉ. शिवा, डॉ. रोशनी सिंह, डॉ. स्ट्रोमलिन, डॉ.योगेश खुंटे, डॉ. लक्ष्मी नायक, डॉ. दिव्या चन्द्रवंशी, डॉ. सीमा भीमनानी, डॉ. अंजली रायकेस, डॉ.विनय, डॉ. तोषन, डॉ. पवन, डॉ. भावना, डॉ. कुदुबुद्दीन, डॉ. गरिमा, डॉ. आदिती, डॉ. नेहा भोई, डॉ.धीरेन्द्र, डॉ. जूही कार्यशाला में विशेष रूप से उपस्थित थे। कार्यक्रम को सफल बनाने में डॉ. धनंजय साहू, डॉ. सरस्वती कश्यप, डॉ. विनय, डॉ. तोषन का विशेष योगदान रहा।

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