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दुर्गा पूजा, दशहरा,ईद-ए-मिलाद एवं दीपावली पर्व शांति पूर्वक मनाने शांति समिति की बैठक संपन्न....



कोरोना प्रोटोकॉल का पालन करते हुए मनाया जाएगा धार्मिक पर्व
कोरबा :- कलेक्टर श्रीमती रानू साहू के निर्देश पर आज दुर्गा उत्सव, दशहरा, ईद-ए-मिलाद एवं दीपावली पर्व को शांति और सौहार्द्र के साथ मनाये जाने के उद्देश्य से शांति समिति की बैठक संपन्न हुई। यह बैठक संयुक्त कलेक्टर श्री सुनील नायक की अध्यक्षता में आज कलेक्टोरेट सभाकक्ष में हुई। बैठक में शामिल दुर्गा समितियों के सदस्यों, गणमान्य नागरिकों, दुर्गा पंडालों के प्रतिनिधियों सहित मुस्लिम समुदाय के प्रतिनिधियों को संयुक्त कलेक्टर श्री नायक ने कोविड-19 के संक्रमण से बचाव एवं रोकथाम के लिये सभी धार्मिक स्थलों के संचालन और दुर्गा पूजा के संबंध में जारी विस्तृत दिशा-निर्देशों की जानकारी दी। बैठक में नगर निगम के अपर आयुक्त श्री अशोक शर्मा, एसडीएम कोरबा श्री हरिशंकर पैंकरा, सीएसपी श्री योगेश साहू, स्वास्थ्य, विद्युत, पर्यावरण, राजस्व अधिकारियों सहित मानवाधिकार बोर्ड, अल्पसंख्यक विभाग, सुन्नी मुस्लिम जमात, जामा मस्जिद, स्टाफ क्वार्टर पूजा मण्डल, दुर्गा पूजा समिति, पटाखा संघ, वंदनीय मातृ समिति, मेमन समाज आदि के प्र्रमुख पदाधिकारी एवं अन्य गणमान्य नागरिक मौजूद रहे।


      बैठक में जिला प्रशासन द्वारा धार्मिक स्थल संचालन से संबंधित जारी किए गए आदेश को विस्तार से बताया गया। जिले में स्थित पूजा- धार्मिक स्थलों में पूजा स्थल के भवन-हॉल-परिसर की क्षमता के 50 प्रतिशत के अधीन व्यक्ति शामिल हो सकेंगे। धार्मिक स्थलों में लोगों को मास्क, सेनेटाइजर एवं सोशल डिस्टेंसिंग के नियमों का पालन करना अनिवार्य होगा। धार्मिक स्थलों के प्रवेश द्वार पर सेनेटाइजर डिस्पेंसर एवं थर्मल स्क्रीनिंग की व्यवस्था पूजा स्थल के संचालक को करनी होगी। पूजा स्थल पर मूर्ति एवं धार्मिक गं्रथो को स्पर्श करना प्रतिबंधित होगा तथा स्थल में बड़ी सभाएं एवं मण्डली कार्यक्रम का आयोजन करना मना रहेगा। जहां तक संभव हो रिकॉर्ड किए गए भक्ति संगीत-गाने बजाए जा सकते हैं। धार्मिक-पूजा स्थल के भीतर प्रसाद वितरण एवं पवित्र जल के छिड़काव करने की अनुमति नहीं रहेगी। परिसर में केवल बिना कोविड लक्षण वाले व्यक्तियों को ही प्रवेश की अनुमति रहेगी। फेस कवर या मास्क का उपयोग करने वाले व्यक्तियों को ही पूजा स्थलों में प्रवेश दिया जाएगा। धार्मिक स्थल के प्रबंधक द्वारा धार्मिक- पूजा स्थल की नियमित साफ-सफाई एवं सेनेटाइजेशन की व्यवस्था सुनिश्चित की जाएगी। आगंतुकों और पूजा स्थल के कर्मचारियों द्वारा उपयोग किए गए फेस कवर, मास्क एवं दस्ताने को उचित निपटान की व्यवस्था धार्मिक स्थल प्रबंधक द्वारा सुनिश्चित की जाएगी। प्रबंधकों को पूजा स्थल में आए हुए श्रद्धालुओं को कोविड टीकाकरण के लिए भी प्रेरित करना होगा।


इस बार दुर्गा पूजा के दौरान मूर्ति की अधिकतम ऊंचाई 8 फीट होगी। परन्तु पीओपी (प्लास्टर ऑफ पेरिस) से निर्मित मूर्ति बिक्री एवं स्थापित करना प्रतिबंधित रहेगा। मूर्ति स्थापना वाले पंडाल का आकार 15 फिट लंबाई और 15 फीट चौड़ाई से अधिक नहीं होगी। पंडाल के सामने कम से कम 500 वर्ग फीट की खुली जगह रखनी होगी। पंडाल एवं सामने 500 वर्ग फीट की खुली जगह में कोई भी सड़क अथवा गली का हिस्सा प्रभावित नहीं होना चाहिए। मंडप या पंडाल के सामने दर्शकों के बैठने के लिए पृथक से पंडाल नही लगाया जाएगा। दर्शकों एवं आयोजकों के बैठने के लिए कुर्सी नहीं लगाई जायेंगी। किसी भी एक समय में मंडप एवं सामने मिलाकर 50 व्यक्ति से अधिक नहीं रहने चाहिए। मूर्ति दर्शन अथवा पूजा में शामिल होने वाला कोई भी व्यक्ति बिना मास्क के नहीं जायेगा। ऐसा पाये जाने पर संबंधित एवं समिति के विरूद्ध वैधानिक कार्रवाई की जाएगी। मूर्ति स्थापित करने वाले व्यक्ति अथवा समिति एक रजिस्टर संधारित करेगी। जिसमें दर्शन के लिए आने वाले सभी व्यक्तियों का नाम, पता, मोबाईल नंबर दर्ज किया जायेगा। ताकि उनमें से कोई भी व्यक्ति कोरोना संक्रमित होने पर कॉन्टेक्ट ट्रेसिंग किया जा सके। मूर्ति स्थापित करने वाले व्यक्ति अथवा समिति द्वारा सैनेटाईजर, थर्मल स्क्रिनिंग, ऑक्सीमीटर, हैंडवाश एवं क्यू मैनेजमेंट सिस्टम की व्यवस्था की जायेगी। थर्मल स्क्रिनिंग में बुखार पाये जाने अथवा कोरोना से संबंधित कोई भी सामान्य या विशेष लक्षण पाये जाने पर पंडाल में प्रवेश नहीं देने की जिम्मेदारी समिति की होगी। व्यक्ति अथवा समिति द्वारा फिजिकल डिस्टेसिंग, आगमन एवं प्रस्थान की पृथक से व्यवस्था बांस बल्ली से बेरिकेटिंग कराकर कराया जाएगा। कंटेनमेंट जोन में मूर्ति स्थापना की अनुमति नहीं होगी। यदि पूजा की अवधि के दौरान भी उपरोक्त क्षेत्र कंटेनमेंट क्षेत्र घोषित हो जाता है, तो तत्काल पूजा समाप्त करनी होगी।
बैठक में बताया गया कि मूर्ति स्थापना के दौरान विसर्जन के समय अथवा विसर्जन के पश्चात् किसी भी प्रकार के भोज भंडारा की अनुमति नहीं होगी। मूर्ति स्थापना के समय, स्थापना के दौरान, विसर्जन के समय, विसर्जन के पश्चात् किसी भी प्रकार के वाद्य यंत्र, ध्वनि विस्तारक यंत्र, डीजे बजाने की अनुमति संबंधित अनुविभागीय दण्डाधिकारी से लिया जाना अनिवार्य होगा। मूर्ति स्थापना एवं विसर्जन के दौरान प्रसाद, चरणामृत या कोई भी खाद्य एवं पेय पदार्थ वितरण की अनुमति नहीं होगी। मूर्ति विसर्जन के लिए एक से अधिक वाहन की अनुमति नहीं होगी एवं मूर्ति विसर्जन के लिए पिकअप टाटाएस (छोटा हाथी) से बड़े वाहन का उपयोग प्रतिबंधित होगा। मूर्ति विसर्जन के वाहन में किसी भी प्रकार के अतिरिक्त साज-सज्जा, झांकी की अनुमति नहीं होगी। मूर्ति विसर्जन के लिए अधिकतम 10 व्यक्ति की ही अनुमति होगी एवं वे मूर्ति के वाहन में ही बैठेंगे। पृथक से वाहन ले जाने की अनुमति नहीं होगी। मूर्ति विसर्जन के लिए प्रयुक्त वाहन पंडाल से लेकर विसर्जन स्थल तक रास्ते में कहीं रोकने की अनुमति नहीं होगी। विसर्जन के मार्ग में कहीं भी स्वागत भंडारा, प्रसाद वितरण पंडाल लगाने की अनुमति नहीं होगी। मूर्ति एवं पूजन सामग्रियों का विसर्जन सबंधित नगर पालिका, नगर पंचायत, जनपद पंचायत द्वारा निर्धारित विसर्जन कुण्ड में ही किया जाएगा। विसर्जन के लिए संबंधित नगर पालिका, नगर निगम, जनपद पंचायत द्वारा निर्धारित रूट मार्ग एवं तिथि व समय का पालन करना होगा। शहर के व्यस्त मार्गों से मूर्ति विसर्जन वाहन को ले जाने की अनुमति नहीं होगी। सूर्यास्त के पश्चात् एवं सूर्याेदय के पहले मूर्ति विसर्जन के किसी भी प्रक्रिया की अनुमति नहीं होगी।
सभी शर्तों सहित किसी परिसर के भीतर या सार्वजनिक स्थान पर मूर्ति स्थापित की जाती है, तो कम से कम 3 दिवस पूर्व संबंधित नगर पालिका, नगर पंचायत, जनपद पंचायत के सबंधित कार्यालय में निर्धारित शपथ-पत्र मय आवेदन देना होगा एवं अनुमति प्राप्त होने के उपरांत ही मूर्ति स्थापित की जा सकेगी। किन्तु यह अनुमति किसी भी ऐसे स्थान पर प्रदान नहीं की जायेगी, जिससे सार्वजनिक निस्तार या यातायात बाधित होने की संभावना हो। इन सभी शर्तों के अतिरिक्त भारत सरकार स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, छत्तीसगढ़ शासन स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग, छत्तीसगढ़ शासन सामान्य प्रशासन विभाग एवं जिला प्रशासन द्वारा समय-समय पर जारी निर्देश व आदेश का पालन अनिवार्य रूप से करना होगा।

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