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गढ़बो कुष्ठ मुक्त बिलाईगढ़ थीम पर हुआ विशेष स्वास्थ्य सर्वेक्षण...


3 हजार 2 सौ से अधिक व्यक्तियों की हुई जाँच, 21कुष्ठ रोगियों की हुई पहचान...मरीजों को मिला जल-तेल उपचार,बांटे गए टब और विशेष चप्पल...
बलौदाबाजार :- जिला कलेक्टर श्री सुनील कुमार जैन के निर्देश एवं मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ खेमराज सोनवानी के नेतृत्व में 2 अक्टूबर गांधी जयंती के अवसर पर पूरे जिले में कुष्ठ रोग के संबंध में जागरूकता कार्यक्रम, सर्वे एवं कुष्ठ मुक्त हेतु संकल्प जैसे कार्यक्रम का आयोजन किया गया।जिले में सबसे अधिक 38% कुष्ठ के केस विकासखंड बिलाईगढ़ में पाए जाते हैं।

ब्लॉक के 51 गांव ऐसे हैं जहां कोई ना कोई कुष्ठ का मरीज अवश्य है। इसे देखते हुए इस दिन गढ़बो कुष्ठ मुक्त बिलाईगढ़ थीम पर कार्य करते हुए बिलाईगढ़ विकासखंड के 6 ग्राम छिर्रा,गोविंदवन ,बेलटिकरी, गिरसा , भिनोदा में एक विशेष कुष्ठ रोग खोज स्वास्थ्य सर्वेक्षण का कार्यक्रम रखा गया। इस खोज में ना केवल स्थानीय चिकित्सा स्टाफ सम्मिलित हुए अपितु संपूर्ण जिले के 6 विकासखंडों के खंड चिकित्सा अधिकारी, चिकित्सा अधिकारी,ग्रामीण चिकित्सा सहायक, फिजियोथैरेपिस्ट,नर्सेज और काउंसलर की एक सम्मिलित टीम बनाकर उक्त ग्रामों में आम जन से व्यक्तिगत संवाद करते हुए सन्देहास्पद कुष्ठ मरीजों की पहचान करने के बाद उन्हें कन्फर्म कर दवाई की व्यवस्था की गई। उक्त ग्रामों में कुल 17 टीम के माध्यम से 3 हजार 2 सौ 5 लोगों की स्क्रीनिंग की गई जिसमें से 39 कुछ लोग संदेहास्पद पाए गए। जबकि 21 मरीज कंफर्म हुए इनमें से पीबी के 13 एवं एमबी के 7 मरीज खोजे गए,सभी का उपचार शुरू किया गया।

जिले के चिकित्सकों को अपने बीच पा कर गांव की जनता का भी रुझान सहयोगात्मक रहा और लोग अपनी स्वास्थ्यगत समस्या हेतु खुल कर सामने आये। राष्ट्रीय कुष्ठ उन्मूलन कार्यक्रम के जिला नोडल अधिकारी डॉ एफ.आर. निराला ने बताया कि कुष्ठ एक बैक्टीरिया जनित संक्रामक रोग है जो बहुत ही धीमी गति से शरीर में फैलता है इसलिए कई बार लक्षण सामने आने में 4 से 5 साल का समय लग जाता है। सुन्न होना,तापमान में बदलाव महसूस ना होना ,स्पर्श महसूस ना होना,यह कुष्ठ के शुरुआती लक्षण हो सकते हैं। इसके अतिरिक्त नसों का क्षतिग्रस्त होना, त्वचा पर फोड़े चकत्ते बनना खासकर दर्द रहित, त्वचा पर सपाट व पीले रंग के घाव या धब्बे बनना,आंखों में सूखापन होना एवं  बड़े-बड़े अल्सर बनना,समय के साथ उंगलियां छोटी होती जाना,चेहरे का रूप बिगड़ना ये कुष्ठ रोग के लक्षण है। कुष्ठ का इलाज पूरी तरह से संभव है,कोई भी व्यक्ति जिसे रोग है वह एमडीटी की दवाई खाकर इससे मुक्त हो सकता है।

यह दवाई हर सरकारी स्वास्थ्य केंद्र में निशुल्क उपलब्ध है।उक्त कार्यक्रमके दौरान सबसे विशेष बात यह रही कि ,ग्राम गोपालपुर के वेलनेस केंद्र में विश्व स्वास्थ्य संगठन के विशेषज्ञ प्रदीप कुंडू के सहयोग से कुष्ठ के मरीजों के लिए परीक्षण एवं प्रबंधन के लिए एक पीओडी शिविर का भी आयोजन किया गया। इसके माध्यम से रोग के कारण होने वाली विकृति से बचाने का तरीका और उसे बढ़ने से रोकने हेतु प्रबंधन जैसे जल -तेल उपचार की जानकारी मरीजों को दी गई। इस शिविर में 12 लोगों की जांच की गई जिसमें से 8 संदेहास्पद पाए गए विकृति युक्त मरीजों को पानी का टब,तेल एवं एमसीआर चप्पल भी निशुल्क वितरित की गई। ग्राम खम्हरिया के 40 वर्षीय रामेश्वर यादव एवं मोहतरा के 52 वर्षीय नवधा ने बताया कि उन्हें नसों में इस बीमारी के कारण समस्या हो रही थी जिसके निदान के लिए उन्होंने कुष्ठ की दवाई का सेवन किया और डॉक्टर की सलाह पर अमल करते हुए जल तेल के उपचार से अब वह काफी ठीक हो चुके  है। इस पूरे कार्यक्रम की निगरानी हेतु मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ सोनवानी,सिविल सर्जन डॉ राजेश अवस्थी एवं जिला कार्यक्रम प्रबंधक सृष्टि मिश्रा द्वारा प्रत्येक सर्वे गांव में भ्रमण किया गया एवं पश्चात शाम को पूरी टीम की समीक्षा बैठक भी रखी गई। बैठक में कुष्ठ के संबंध में नोडल अधिकारी और सीएमएचओ ने एसीडीआर रजिस्टर मेंटेन रखने, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में दवा उपलब्ध करवाने,दवाई का भंडार पर्याप्त रखने,आवश्यकता पड़ने और प्रशिक्षण देने के निर्देश बिलाईगढ़ के खंड चिकित्सा अधिकारी को दिए गए।कार्यक्रम का समन्वय प्रभारी जिला कुष्ठ सलाहकार डॉ सुजाता पांडेय द्वारा किया गया। जबकि टीम लीडर के रूप में बीएमओ,सिमगा से डॉक्टर पारस पटेल,कसडोल से डॉक्टर अंजन सिंह चौहान,पलारी से डॉ एफ आर निराला, बलौदाबाजार से डॉ राकेश कुमार प्रेमी बिलाईगढ़ से डॉक्टर राजेश प्रधान ने विशेष सहयोग दिया। कार्यक्रम हेतु उक्त गांवों के सरपंचों ने स्वास्थ्य विभाग का आभार व्यक्त किया गया है।


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