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वार्ड क्रमांक 52 में पुज्य गुरु घासीदास बाबा जी की 265वीं जंयती गुरुपर्व सतनाम सेवा समिति नगोईखार दर्री में मनाया गया...




कोरबा :-- वार्ड क्र. 52 के नगोईखार दर्री में आयोजित गुरूघासीदास बाबा की 265वीं जयंती कार्यक्रम में महापौर राजकिशोर प्रसाद ने बाबा गुरूघासीदास बाबा के तैलचित्र एवं जैतखाम पर पुष्पांजलि अर्पित कर विधि विधान से पूजा अर्चना की। महापौर राजकिशोर प्रसाद ने बताया कि गुरू घासीदास ने मनखे मनखे एक समान का संदेश दिया है। उन्होने आगे कहा कि गुरु घासीदास का जन्म ऐसे समय हुआ जब समाज में छुआछूत, ऊंचनीच, झूठ-कपट का बोलबाला था, बाबा ने ऐसे समय में समाज में समाज को एकता, भाईचारे तथा समरसता का संदेश दिया। घासीदास की सत्य के प्रति अटूट आस्था की वजह से ही इन्होंने बचपन में कई चमत्कार दिखाए, जिसका लोगों पर काफी प्रभाव पड़ा।

सभापति श्याम सुंदर सोनी ने कहा कि गुरू घासीदास के संदेशों का समाज के पिछड़े समुदाय में गहरा असर पड़ा। सन् 1901 की जनगणना के अनुसार उस वक्त लगभग 4 लाख लोग सतनाम पंथ से जुड़ चुके थे और गुरू घासीदास के अनुयायी थे। छत्तीसगढ़ के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम सेनानी वीर नारायण सिंह पर भी गुरू घासीदास के सिध्दांतों का गहरा प्रभाव था।

पूर्व सभापति एवं एमआईसी सदस्य संतोष राठौर ने बताया कि बाबा गुरु घासीदास की जयंती से हमें पूजा करने की प्रेरणा मिलती है और पूजा से सद्विचार तथा एकाग्रता बढ़ती है। इससे समाज में सद्कार्य करने की प्रेरणा मिलती है। वे सत्य की तलाश के लिए गिरौदपुरी के जंगल में छाता पहाड़ पर समाधि लगाए इस बीच गुरूघासीदास जी ने गिरौदपुरी में अपना आश्रम बनाया तथा सोनाखान के जंगलों में सत्य और ज्ञान की खोज के लिए लम्बी तपस्या भी की।
जयंती कार्यक्रम में प्रेमचंद प्रसाद पाण्डेय, श्रीमती इंदिरा नवरंग, रमेश नवंरग, संत दास दिवाकर, राजमंहत, एस आर अंचले, अध्यक्ष विरेन्द्र कुमार धृतलहरे, सचिव जन्तु कुर्रे, उपाध्यक्ष दिनेश भारती, कोषाध्यक्ष विजय कुमार जोशी, दरशराम सेवक, शाह राम नवरंग, विनोद भास्कर, कुंवर मिरी, भरत सहित सतनामी समाज के गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।

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